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श्लोक 7.75.4  |
यथा शरीरो बालस्य गुप्त: सन् क्लिष्टकर्मण:।
विपत्ति: परिभेदो वा न भवेच्च तथा कुरु॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| ऐसी व्यवस्था करो जिससे शुभ कर्म करने वाले इस बालक का शरीर सुरक्षित रहे, नष्ट या खंडित न हो।’ ॥4॥ |
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| Make such arrangements so that the body of this child, who is doing auspicious deeds, remains safe and does not get destroyed or broken.' ॥ 4॥ |
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