श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 75: श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अपने राज्य की सभी दिशाओं में घूमकर दुष्कर्म का पता लगाना; किंतु सर्वत्र सत्कर्म ही देखकर दक्षिण दिशा में एक शूद्र तपस्वी के पास पहुँचना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.75.14 
तस्मिन् सरसि तप्यन्तं तापसं सुमहत्तप:।
ददर्श राघव: श्रीमाँल्लम्बमानमधोमुखम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस सरोवर के तट पर एक तपस्वी अत्यन्त घोर तप कर रहा था। वह अधोमुख होकर लटका हुआ था। रघुकुलनन्दन श्री राम ने उसे देखा॥14॥
 
On the bank of that lake, an ascetic was performing a very intense penance. He was hanging with his face downwards. Raghukulnandan Shri Ram saw him.॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)