श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 75: श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अपने राज्य की सभी दिशाओं में घूमकर दुष्कर्म का पता लगाना; किंतु सर्वत्र सत्कर्म ही देखकर दक्षिण दिशा में एक शूद्र तपस्वी के पास पहुँचना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.75.13 
दक्षिणां दिशमाक्रामत् ततो राजर्षिनन्दन:।
शैवलस्योत्तरे पार्श्वे ददर्श सुमहत्सर:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजा रघुनाथ दक्षिण दिशा की ओर गए, जहां उन्होंने शैवल पर्वत के उत्तरी भाग में एक विशाल सरोवर देखा।
 
Then King Raghunath went towards the south. There he saw a huge lake in the northern part of the Shaival mountain.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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