श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 75: श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अपने राज्य की सभी दिशाओं में घूमकर दुष्कर्म का पता लगाना; किंतु सर्वत्र सत्कर्म ही देखकर दक्षिण दिशा में एक शूद्र तपस्वी के पास पहुँचना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.75.10 
प्रायात् प्रतीचीं हरितं विचिन्वंश्च ततस्तत:।
उत्तरामगमच्छ्रीमान् दिशं हिमवतावृताम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्री राम पहले इधर-उधर खोजते हुए पश्चिम दिशा की ओर चले, फिर हिमालय से घिरी हुई उत्तर दिशा में पहुँचे॥10॥
 
Sri Rama first searched here and there and went towards the west. Then he reached the north direction surrounded by the Himalayas.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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