श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 74: नारदजी का श्रीराम से एक तपस्वी शूद्र के अधर्माचरण को ब्राह्मण-बालक की मृत्यु में कारण बताना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.74.33 
एवं चेद् धर्मवृद्धिश्च नृणां चायुर्विवर्धनम्।
भविष्यति नरश्रेष्ठ बालस्यास्य च जीवितम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! ऐसा करने से धर्म की वृद्धि होगी और मनुष्यों की आयु बढ़ेगी। साथ ही इस बालक को भी नया जीवन मिलेगा।॥33॥
 
‘O best of men! By doing this, Dharma will increase and the lifespan of humans will increase. Along with that, this child will also get a new life.’॥ 33॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे चतु:सप्ततितम: सर्ग: ॥ ७ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें चौहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ७ ४॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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