|
| |
| |
श्लोक 7.74.33  |
एवं चेद् धर्मवृद्धिश्च नृणां चायुर्विवर्धनम्।
भविष्यति नरश्रेष्ठ बालस्यास्य च जीवितम्॥ ३३॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| हे पुरुषश्रेष्ठ! ऐसा करने से धर्म की वृद्धि होगी और मनुष्यों की आयु बढ़ेगी। साथ ही इस बालक को भी नया जीवन मिलेगा।॥33॥ |
| |
| ‘O best of men! By doing this, Dharma will increase and the lifespan of humans will increase. Along with that, this child will also get a new life.’॥ 33॥ |
| |
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे चतु:सप्ततितम: सर्ग: ॥ ७ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें चौहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ७ ४॥ |
| |
| ✨ ai-generated |
| |
|