श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 74: नारदजी का श्रीराम से एक तपस्वी शूद्र के अधर्माचरण को ब्राह्मण-बालक की मृत्यु में कारण बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.74.3 
ततो द्विजा वसिष्ठेन सार्धमष्टौ प्रवेशिता:।
राजानं देवसंकाशं वर्धस्वेति ततोऽब्रुवन्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वसिष्ठजी सहित आठ ब्राह्मण राजसभा में आये और उस देवतुल्य राजा से बोले - 'महाराज! आपकी जय हो।'
 
Thereafter eight Brahmins along with Vasishtha entered the royal court and said to that god-like king - 'Maharaj! Victory to you.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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