श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 74: नारदजी का श्रीराम से एक तपस्वी शूद्र के अधर्माचरण को ब्राह्मण-बालक की मृत्यु में कारण बताना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.74.27 
हीनवर्णो नृपश्रेष्ठ तप्यते सुमहत्तप:।
भविष्यच्छूद्रयोन्यां हि तपश्चर्या कलौ युगे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'नृपशिरोमणे! एक समय ऐसा आएगा जब हीन वर्ण वाला व्यक्ति भी महान तप करेगा। कलियुग आने पर शूद्रायणों में उत्पन्न होने वाले भावी मानव समुदाय में तप की प्रवृत्ति होगी।' 27॥
 
‘Nripashiromane! There will come a time when even a person of inferior complexion will perform great penance. When Kaliyuga arrives, there will be a tendency towards asceticism in the future community of humans born among the Shudrayans. 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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