श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 74: नारदजी का श्रीराम से एक तपस्वी शूद्र के अधर्माचरण को ब्राह्मण-बालक की मृत्यु में कारण बताना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.74.26 
त्रिभ्यो युगेभ्यस्त्रीन् वर्णान् धर्मश्च परिनिष्ठित:।
न शूद्रो लभते धर्मं युगतस्तु नरर्षभ॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तीन युगों में तपरूपी धर्म तीन वर्णों का ही आश्रय लेकर प्रतिष्ठित होता है; परंतु पुरुषश्रेष्ठ! शूद्र को इन तीन युगों में तपरूपी धर्म का अधिकार नहीं मिलता ॥26॥
 
In three eras, the religion in the form of asceticism is established by taking shelter of only three varnas; But male best! Shudra does not get the right to religion in the form of penance in these three eras. 26॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd