श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 74: नारदजी का श्रीराम से एक तपस्वी शूद्र के अधर्माचरण को ब्राह्मण-बालक की मृत्यु में कारण बताना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.74.20 
त्रेतायुगे च वर्तन्ते ब्राह्मणा: क्षत्रियाश्च ये।
तपोऽतप्यन्त ते सर्वे शुश्रूषामपरे जना:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
परन्तु त्रेतायुग में केवल ब्राह्मण और क्षत्रिय ही तप करते हैं। अन्य जाति के लोग सेवाकार्य करते हैं॥20॥
 
‘However, in the Treta Yuga, only the Brahmins and Kshatriyas perform austerities. People of other castes perform service activities.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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