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ramayan 7.73.8: फिर किस पाप के कारण मेरा पुत्र इस बाल्यकाल में अपने पितरों का श्राद्ध किए बिना ही यमराज के घर चला गया?   |   ramayan सर्ग 7.73: एक ब्राह्मण का अपने मरे हुए बालक को राजद्वार पर लाना तथा राजा को ही दोषी बताकर विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.73.8 
केनाद्य दुष्कृतेनायं बाल एव ममात्मज:।
अकृत्वा पितृकार्याणि गतो वैवस्वतक्षयम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
फिर किस पाप के कारण मेरा पुत्र इस बाल्यकाल में अपने पितरों का श्राद्ध किए बिना ही यमराज के घर चला गया?
 
Then, due to which sin has my son gone to Yamraj's home in this childhood without performing the rituals for his ancestors? 8
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)