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श्लोक 7.73.19  |
एवं बहुविधैर्वाक्यैरुपरुध्य मुहुर्मुहु:।
राजानं दु:खसंतप्त: सुतं तमुपगूहति॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार उसने राजा के समक्ष अनेक प्रकार से अपना दुःख प्रकट किया। दुःख से अभिभूत होकर उसने बार-बार अपने मृत पुत्र को उठाकर हृदय से लगा लिया। |
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| In this manner he repeatedly expressed his grief to the king in many ways. Overwhelmed with grief, he repeatedly picked up his dead son and held him close to his heart. |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे त्रिसप्ततितम: सर्ग: ॥ ७ ३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें तिहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ७ ३॥ |
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