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ramayan 7.73.16: ‘जब राजा के दोष से प्रजा का ठीक से पालन नहीं होता, तभी प्रजा को ऐसी विपत्तियों का सामना करना पड़ता है। राजा के दुष्ट होने पर ही प्रजा अकाल मृत्यु को प्राप्त होती है।॥16॥   |   ramayan सर्ग 7.73: एक ब्राह्मण का अपने मरे हुए बालक को राजद्वार पर लाना तथा राजा को ही दोषी बताकर विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 73: एक ब्राह्मण का अपने मरे हुए बालक को राजद्वार पर लाना तथा राजा को ही दोषी बताकर विलाप करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.73.16 
राजदोषैर्विपद्यन्ते प्रजा ह्यविधिपालिता:।
असद‍्वृत्ते हि नृपतावकाले म्रियते जन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘जब राजा के दोष से प्रजा का ठीक से पालन नहीं होता, तभी प्रजा को ऐसी विपत्तियों का सामना करना पड़ता है। राजा के दुष्ट होने पर ही प्रजा अकाल मृत्यु को प्राप्त होती है।॥16॥
 
‘When the subjects are not looked after properly due to the fault of the king, then only the subjects have to face such calamities. Only when the king is wicked, the subjects die prematurely.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)