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ramayan 7.73.14: श्री राम! आपके अधीन रहने वाले हम लोगों पर अचानक ही बालक की मृत्यु का दुःख आ पड़ा है, जिससे हम स्वयं भी मृत्यु के अधीन हो गए हैं; इसलिए आपके राज्य में हमें किंचित मात्र भी सुख नहीं मिला॥14॥   |   ramayan सर्ग 7.73: एक ब्राह्मण का अपने मरे हुए बालक को राजद्वार पर लाना तथा राजा को ही दोषी बताकर विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 73: एक ब्राह्मण का अपने मरे हुए बालक को राजद्वार पर लाना तथा राजा को ही दोषी बताकर विलाप करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.73.14 
इदं तु पतितं तस्मात् तव राम वशे स्थितान्।
कालस्य वशमापन्ना: स्वल्पं हि नहि न: सुखम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! आपके अधीन रहने वाले हम लोगों पर अचानक ही बालक की मृत्यु का दुःख आ पड़ा है, जिससे हम स्वयं भी मृत्यु के अधीन हो गए हैं; इसलिए आपके राज्य में हमें किंचित मात्र भी सुख नहीं मिला॥14॥
 
Shri Ram! The sorrow of the death of a child has suddenly fallen on us who are under your control, due to which we ourselves have also become subject to death; therefore we did not get even a little happiness in your kingdom.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)