श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 72: वाल्मीकिजी से विदा ले शत्रुघ्नजी का अयोध्या में जाकर श्रीराम आदि से मिलना और सात दिनोंतक वहाँ रहकर पुनः मधुपुरी को प्रस्थान करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.72.3 
तस्यां रजन्यां व्युष्टायां कृत्वा पौर्वाह्णिकक्रमम्।
उवाच प्राञ्जलिर्वाक्यं शत्रुघ्नो मुनिपुङ्गवम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब वह रात्रि बीत गई और प्रातःकाल हुआ, तब प्रातःकालीन क्रियाएँ करके शत्रुघ्न ने हाथ जोड़कर महर्षि वाल्मीकि से कहा-॥3॥
 
When that night passed and the morning came, then after performing the morning rituals, Shatrughna with folded hands said to the sage Valmiki -॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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