श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 72: वाल्मीकिजी से विदा ले शत्रुघ्नजी का अयोध्या में जाकर श्रीराम आदि से मिलना और सात दिनोंतक वहाँ रहकर पुनः मधुपुरी को प्रस्थान करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.72.21 
दूरं पद‍्भ्यामनुगतो लक्ष्मणेन महात्मना।
भरतेन च शत्रुघ्नो जगामाशु पुरीं तदा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महात्मा लक्ष्मण और भरत पैदल ही उनके पीछे-पीछे काफी दूर तक गए। तत्पश्चात शत्रुघ्न शीघ्र ही रथ पर सवार होकर अपनी राजधानी के लिए रवाना हो गए।
 
Mahatma Lakshmana and Bharata followed them on foot for a long distance to reach them. After that Shatrughna quickly left for his capital in a chariot.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे द्विसप्ततितम: सर्ग: ॥ ७ २॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें बहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ७ २॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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