श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 72: वाल्मीकिजी से विदा ले शत्रुघ्नजी का अयोध्या में जाकर श्रीराम आदि से मिलना और सात दिनोंतक वहाँ रहकर पुनः मधुपुरी को प्रस्थान करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.72.20 
आमन्त्र्य तु महात्मानं रामं सत्यपराक्रमम्।
भरतं लक्ष्मणं चैव महारथमुपारुहत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा एवं पराक्रमी श्री राम, भरत और लक्ष्मण से विदा लेकर शत्रुघ्न एक विशाल रथ पर सवार हुए।
 
After taking leave from the virtuous and valiant Sri Rama, Bharata and Lakshmana, Shatrughna mounted on a huge chariot.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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