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श्लोक 7.72.20  |
आमन्त्र्य तु महात्मानं रामं सत्यपराक्रमम्।
भरतं लक्ष्मणं चैव महारथमुपारुहत्॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| धर्मात्मा एवं पराक्रमी श्री राम, भरत और लक्ष्मण से विदा लेकर शत्रुघ्न एक विशाल रथ पर सवार हुए। |
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| After taking leave from the virtuous and valiant Sri Rama, Bharata and Lakshmana, Shatrughna mounted on a huge chariot. |
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