श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 72: वाल्मीकिजी से विदा ले शत्रुघ्नजी का अयोध्या में जाकर श्रीराम आदि से मिलना और सात दिनोंतक वहाँ रहकर पुनः मधुपुरी को प्रस्थान करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.72.2 
तस्य शब्दं सुमधुरं तन्त्रीलयसमन्वितम्।
श्रुत्वा रात्रिर्जगामाशु शत्रुघ्नस्य महात्मन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वीणा की ताल के साथ रामचरितमानस की मधुर ध्वनि सुनते हुए महात्मा शत्रुघ्न ने शेष रात्रि शीघ्रता से व्यतीत कर दी॥ 2॥
 
Listening to the melodious sound of the Ramacharita song along with the rhythm of the Veena, Mahatma Shatrughna passed the rest of the night very quickly.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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