श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 72: वाल्मीकिजी से विदा ले शत्रुघ्नजी का अयोध्या में जाकर श्रीराम आदि से मिलना और सात दिनोंतक वहाँ रहकर पुनः मधुपुरी को प्रस्थान करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.72.19 
सप्तरात्रं च काकुत्स्थो राघवस्य यथाज्ञया।
उष्य तत्र महेष्वासो गमनायोपचक्रमे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी की आज्ञा से सात दिन तक अयोध्या में रहने के बाद ककुत्स्थ कुल के रत्न महाधनुर्धर शत्रुघ्न वहाँ से प्रस्थान करने के लिए तैयार हुए॥19॥
 
After staying in Ayodhya for seven days by the order of Shri Raghunathji, the great archer Shatrughna, the jewel of the Kakutstha clan, got ready to leave from there.॥ 19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd