श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 72: वाल्मीकिजी से विदा ले शत्रुघ्नजी का अयोध्या में जाकर श्रीराम आदि से मिलना और सात दिनोंतक वहाँ रहकर पुनः मधुपुरी को प्रस्थान करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.72.11 
द्वादशैतानि वर्षाणि त्वां विना रघुनन्दन।
नोत्सहेयमहं वस्तुं त्वया विरहितो नृप॥ ११॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! ये बारह वर्ष तो आपके दर्शन के बिना ही किसी प्रकार बीत गए; किन्तु हे मनुष्यों के स्वामी! अब मुझमें आपसे दूर रहने का साहस नहीं है।
 
Raghunandan! These twelve years have passed somehow without seeing you; but O Lord of men! I do not have the courage to stay away from you for any longer.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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