श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 72: वाल्मीकिजी से विदा ले शत्रुघ्नजी का अयोध्या में जाकर श्रीराम आदि से मिलना और सात दिनोंतक वहाँ रहकर पुनः मधुपुरी को प्रस्थान करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.72.10 
यदाज्ञप्तं महाराज सर्वं तत् कृतवानहम्।
हत: स लवण: पाप: पुरी चास्य निवेशिता॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपने मुझे जो कार्य करने का आदेश दिया था, वह सब मैंने पूरा कर दिया है। पापी लवण मारा गया और उसका राज्य भी बस गया॥10॥
 
‘Maharaj! I have completed all the work you had ordered me to do. The sinner Lavan was killed and his kingdom was also settled.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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