श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.71.8 
स त्वया निहत: पापो लीलया पुरुषर्षभ।
जगतश्च भयं तत्र प्रशान्तं तव तेजसा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! उस पापी लवणासुर को आपने अनायास ही मार डाला। उसके कारण संसार में जो भय व्याप्त हो गया था, वह आपके तेज से शान्त हो गया।
 
O best of men! That sinner Lavanasur was killed by you effortlessly. The fear that had spread in the world due to him was calmed by your brilliance.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd