श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.71.5 
बहुरूपा: सुमधुरा: कथास्तत्र सहस्रश:।
कथयामास स मुनि: शत्रुघ्नाय महात्मने॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ महर्षि वाल्मीकि ने महात्मा शत्रुघ्न को हजारों प्रकार की मधुर कथाएँ सुनाईं।
 
There Maharishi Valmiki narrated thousands of different sweet stories to Mahatma Shatrughna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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