श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.71.14 
स भुक्तवान् नरश्रेष्ठो गीतमाधुर्यमुत्तमम्।
शुश्राव रामचरितं तस्मिन् काले यथाक्रमम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पुरुषोत्तम शत्रुघ्न ने भोजन किया और उस समय श्री रामचन्द्रजी के चरित्र का वर्णन सुना, जो मधुर गान के कारण अत्यन्त प्रिय और उत्तम प्रतीत हुआ॥14॥
 
Shatrughan, the best of men, had his meal and at that time heard the description of the character of Shri Ramchandraji, who, due to the sweetness of the song, seemed very dear and excellent. 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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