श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.71.13 
इत्युक्त्वा मूर्ध्नि शत्रुघ्नमुपाघ्राय महामति:।
आतिथ्यमकरोत् तस्य ये च तस्य पदानुगा:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर बुद्धिमान वाल्मीकि ने शत्रुघ्न का सिर सूंघा और उनका तथा उनके साथियों का आतिथ्य किया।
 
Having said this the wise Valmiki smelt the head of Shatrughna and extended hospitality to him and his companions.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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