श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.71.11 
तच्च युद्धं मया दृष्टं यथावत् पुरुषर्षभ।
सभायां वासवस्याथ उपविष्टेन राघव॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! मैं इन्द्र की सभा में बैठा था। जब वह विमानरूपी सभा युद्ध देखने आई, तब मैंने भी वहाँ बैठकर आपके और लवण के बीच हुए युद्ध को भली-भाँति देखा। 11.
 
O best of men! I was sitting in Indra's court. When that plane-shaped court came to watch the war, then sitting there I too saw the battle between you and Lavana very well. 11.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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