श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 71: शत्रुघ्न का थोड़े-से सैनिकों के साथ अयोध्या को प्रस्थान, मार्ग में वाल्मीकि के आश्रम में रामचरित का गान सुनकर उन सबका आश्चर्यचकित होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.71.10 
प्रीतिश्चास्मिन् परा जाता देवानां लवणे हते।
भूतानां चैव सर्वेषां जगतश्च प्रियं कृतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
लवणासुर के वध से देवतागण बहुत प्रसन्न हैं। तुमने समस्त प्राणियों और समस्त जगत को प्रिय कार्य किया है। 10॥
 
The gods are very happy with the killing of Lavanasura. You have done a work dear to all the living beings and the entire world. 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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