श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 70: देवताओं से वरदान पा शत्रुघ्न का मधुरापुरी को बसाकर बारहवें वर्ष में वहाँ से श्रीराम के पास जाने का विचार करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.70.9 
सा पुरा दिव्यसंकाशा वर्षे द्वादशमे शुभे।
निविष्ट: शूरसेनानां विषयश्चाकुतोभय:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तब से लेकर बारहवें वर्ष तक वह नगर और शूरसेन जनपद पूर्णतया बसा हुआ था। वहाँ किसी का भय नहीं था। वह देश दिव्य सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण था॥9॥
 
From then till the twelfth year that city and that Shursen district were completely settled. There was no fear from anyone there. That country was full of divine comforts and amenities.॥9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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