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ramayan 7.70.6: तब देवताओं ने रघुकुलपुत्र शत्रुघ्न पर प्रसन्न होकर कहा, 'बहुत अच्छा है। यह सुन्दर नगरी निःसंदेह वीर योद्धाओं की सेना से भर जाएगी।'   |   ramayan सर्ग 7.70: देवताओं से वरदान पा शत्रुघ्न का मधुरापुरी को बसाकर बारहवें वर्ष में वहाँ से श्रीराम के पास जाने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 70: देवताओं से वरदान पा शत्रुघ्न का मधुरापुरी को बसाकर बारहवें वर्ष में वहाँ से श्रीराम के पास जाने का विचार करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.70.6 
तं देवा: प्रीतमनसो बाढमित्येव राघवम्।
भविष्यति पुरी रम्या शूरसेना न संशय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तब देवताओं ने रघुकुलपुत्र शत्रुघ्न पर प्रसन्न होकर कहा, 'बहुत अच्छा है। यह सुन्दर नगरी निःसंदेह वीर योद्धाओं की सेना से भर जाएगी।'
 
Then the Gods, pleased with the son of Raghukul, Shatrughna, said, 'It is very good. This beautiful city will undoubtedly be filled with an army of valiant warriors.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)