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श्लोक 7.70.5  |
इयं मधुपुरी रम्या मधुरा देवनिर्मिता।
निवेशं प्राप्नुयाच्छीघ्रमेष मेऽस्तु वर: पर:॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| हे देवताओं! देवताओं द्वारा निर्मित यह सुन्दर मधुपुरी शीघ्र ही सुन्दर राजधानी बन जाए, यही मेरे लिए उत्तम वर है॥5॥ |
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| ‘O Gods! May this beautiful Madhupuri, built by the gods, soon become a beautiful capital. This is the best boon for me.’॥ 5॥ |
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