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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 70: देवताओं से वरदान पा शत्रुघ्न का मधुरापुरी को बसाकर बारहवें वर्ष में वहाँ से श्रीराम के पास जाने का विचार करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.70.2 
दिष्टॺा ते विजयो वत्स दिष्टॺा लवणराक्षस:।
हत: पुरुषशार्दूल वरं वरय सुव्रत॥ २॥
 
 
अनुवाद
पुत्र! यह सौभाग्य की बात है कि तुम विजयी हुए और लवणासुर मारा गया। हे उत्तम व्रतों का पालन करने वाले सिंह पुरुष! वर मांगो।
 
Son! It is fortunate that you have been victorious and Lavanasur has been killed. O lion man who has observed the best vows! Ask for a boon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)