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ramayan 7.70.1: लवणासुर के मरने के बाद इन्द्र और अग्नि आदि देवता आये और शत्रुओं को संताप देने वाले शत्रुघ्न से अत्यन्त मधुर वाणी में बोले- 1॥   |   ramayan सर्ग 7.70: देवताओं से वरदान पा शत्रुघ्न का मधुरापुरी को बसाकर बारहवें वर्ष में वहाँ से श्रीराम के पास जाने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 70: देवताओं से वरदान पा शत्रुघ्न का मधुरापुरी को बसाकर बारहवें वर्ष में वहाँ से श्रीराम के पास जाने का विचार करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.70.1 
हते तु लवणे देवा: सेन्द्रा: साग्निपुरोगमा:।
ऊचु: सुमधुरां वाणीं शत्रुघ्नं शत्रुतापनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
लवणासुर के मरने के बाद इन्द्र और अग्नि आदि देवता आये और शत्रुओं को संताप देने वाले शत्रुघ्न से अत्यन्त मधुर वाणी में बोले- 1॥
 
After the death of Lavanasura, gods like Indra and Agni came and spoke in a very sweet voice to Shatrughan who tormented the enemies - 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)