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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 69: शत्रुघ्न और लवणासुर का युद्ध तथा लवण का वध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.69.6 
त्वयि मद‍्बाणनिर्दग्धे पतितेऽद्य निशाचर।
पुरे जनपदे चापि क्षेममेव भविष्यति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे रात्रि-अंधकारमय! आज जब तुम मेरे बाणों से भस्म होकर भूमि पर गिरोगे, तब इस नगर और जनपद में सबका कल्याण होगा।
 
O night-dark one! Today when you fall to the ground after being burnt by my arrows, then everyone in this city and the district will prosper.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)