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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 69: शत्रुघ्न और लवणासुर का युद्ध तथा लवण का वध  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.69.40 
ततो हि देवा ऋषिपन्नगाश्च
प्रपूजिरे ह्यप्सरसश्च सर्वा:।
दिष्टॺा जयो दाशरथेरवाप्त-
स्त्यक्त्वा भयं सर्प इव प्रशान्त:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
यह सौभाग्य की बात है कि दशरथपुत्र शत्रुघ्न ने उसके भय पर विजय प्राप्त कर ली और लवणासुर सर्प की भाँति मर गया।’ ऐसा कहकर उस समय देवता, ऋषि, नाग और समस्त स्वर्ग की अप्सराएँ शत्रुघ्न की खूब स्तुति करने लगीं।
 
It is a matter of good fortune that Shatrughna, son of Dasharatha, overcame his fear and achieved victory and Lavanasur died like a serpent.' Having said this, the gods, sages, serpents and all the celestial nymphs began to praise Shatrughna profusely at that time.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे एकोनसप्ततितम: सर्ग: ॥ ६ ९॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें उनहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ६ ९॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)