श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 69: शत्रुघ्न और लवणासुर का युद्ध तथा लवण का वध  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.69.39 
एकेषुपातेन भयं निपात्य
लोकत्रयस्यास्य रघुप्रवीर:।
विनिर्बभावुत्तमचापबाण-
स्तम: प्रणुद्येव सहस्ररश्मि:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उत्तम धनुष-बाण धारण करने वाले रघुकुल के प्रधान वीर शत्रुघ्न एक ही बाण से तीनों लोकों का भय नष्ट करके उसी प्रकार सुशोभित हो गए, जैसे सहस्रों किरणों वाले सूर्यदेव त्रिभुवन का अंधकार दूर करके प्रकाशित हो जाते हैं॥39॥
 
In this way, the brave Shatrughan, the chief of the Raghu clan, who wielded an excellent bow and arrow, destroyed the fear of the three worlds with a single arrow and became adorned in the same way as the Sun God, having thousands of rays, becomes illuminated after removing the darkness of the Tribhuvan. 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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