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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 69: शत्रुघ्न और लवणासुर का युद्ध तथा लवण का वध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.69.18 
वज्राननं वज्रवेगं मेरुमन्दरसंनिभम्।
नतं पर्वसु सर्वेषु संयुगेष्वपराजितम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उसका मुख और गति वज्र के समान थी। वह मेरु और मंदराचल पर्वत के समान भारी था। उसके घुटने मुड़े हुए थे और वह किसी भी युद्ध में पराजित नहीं होने वाला था। 18.
 
His face and speed were like a thunderbolt. He was as heavy as Mount Meru and Mount Mandara. His knees were bent and he was not going to be defeated in any battle. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)