श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 69: शत्रुघ्न और लवणासुर का युद्ध तथा लवण का वध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.69.17 
ततो दिव्यममोघं तं जग्राह शरमुत्तमम्।
ज्वलन्तं तेजसा घोरं पूरयन्तं दिशो दश॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शत्रुघ्न ने उस दिव्य, अमोघ और उत्तम बाण को हाथ में लिया जो अपनी प्रचण्ड चमक से प्रज्वलित होकर दसों दिशाओं में फैल रहा था॥17॥
 
Thereafter Shatrughna took in his hand that divine, infallible and excellent arrow which was blazing with its intense brilliance and spreading in all the ten directions.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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