श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.65.38 
तस्य कल्माषपादस्य यज्ञस्यायतनं शुभम्।
आश्रमस्य समीपेऽस्य यन्मां पृच्छसि राघव॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! जिन राजा कल्माषपाद के विषय में आप पूछ रहे थे, उन्हीं का यह सुन्दर यज्ञस्थल मेरे आश्रम के निकट दिखाई दे रहा है।॥38॥
 
Raghunandan! This beautiful place of the yajna of the same king Kalmashpada, about whom you were asking, is visible near my hermitage.' ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)