श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.65.36 
कालो द्वादशवर्षाणि शापस्यान्तो भविष्यति।
मत् प्रसादाच्च राजेन्द्र अतीतं न स्मरिष्यसि॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
"राजेन्द्र! वह वरदान इस प्रकार है - यह श्राप बारह वर्ष तक रहेगा। उसके बाद इसका अंत हो जाएगा। मेरी कृपा से तुम्हें पिछली घटनाएँ याद नहीं रहेंगी।"
 
"Rajendra! That boon is as follows - this curse will last for twelve years. After that it will end. By my grace you will not remember the past events."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)