श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.65.34 
तच्छ्रुत्वा पार्थिवेन्द्रस्य रक्षसा विकृतं च तत्।
पुन: प्रोवाच राजानं वसिष्ठ: पुरुषर्षभम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
राजा मित्रासह के उन वचनों को सुनकर और यह जानकर कि यह किसी राक्षस का काम है, वशिष्ठजी ने पुनः उस महाबली राजा से कहा - 34॥
 
Hearing those words of King Mitrasah and realizing that it was the handiwork of a demon, Vashishtha again said to that great king - 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)