श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.65.12 
शार्दूलरूपिणौ घोरौ मृगान् बहुसहस्रश:।
भक्षमाणावसंतुष्टौ पर्याप्तिं नैव जग्मतु:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों भयंकर राक्षस बाघों का रूप धारण करके हजारों हिरणों को मारकर खा गए। फिर भी उनकी तृप्ति नहीं हुई। उनका पेट नहीं भरा।॥12॥
 
‘Those two fierce demons took the form of tigers and killed and ate thousands of deer. Still they were not satisfied. Their stomachs were not full.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)