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श्लोक 7.63.8  |
कामकारो ह्यहं राजंस्तवास्मि पुरुषर्षभ।
अधर्मं जहि काकुत्स्थ मत्कृते रघुनन्दन॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! हे महापुरुष रघुनन्दन! मैं आपकी इच्छानुसार कार्य करूँगा। परन्तु इसमें जो भी पाप कर्म मुझसे हो, उसे आप नष्ट कर दीजिए।॥8॥ |
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| O King! O great man Raghunandan! I will do whatever you wish. But whatever sinful act I get in this, you must destroy it.'॥ 8॥ |
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