श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 63: श्रीराम द्वारा शत्रुघ्न का राज्याभिषेक तथा उन्हें लवणासुर के शूल से बचने के उपाय का प्रतिपादन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.63.28 
स त्वं पुरुषशार्दूल तमायुधविनाकृतम्।
अप्रविष्टं पुरं पूर्वं द्वारि तिष्ठ धृतायुध:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मानसिंह! जब वह भाला उसके पास न रहे और वह नगर में न पहुँचे, तब तुम पहले से ही नगर के द्वार पर जाकर अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर उसकी प्रतीक्षा करो॥ 28॥
 
Mansingh! When that spear is not with him and he has not reached the city, go to the city gate in advance and wait for him, armed with weapons.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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