श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 63: श्रीराम द्वारा शत्रुघ्न का राज्याभिषेक तथा उन्हें लवणासुर के शूल से बचने के उपाय का प्रतिपादन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.63.27 
यदा तु युद्धमाकाङ्क्षन् कश्चिदेनं समाह्वयेत्।
तदा शूलं गृहीत्वा तु भस्म रक्ष: करोति हि॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जब कोई युद्ध की इच्छा से उसे ललकारता है, तब वह राक्षस उस भाले को लेकर अपने विरोधी को जलाकर भस्म कर देता है॥27॥
 
When someone challenges him with a desire for battle, then that demon takes that spear and burns his opponent to ashes.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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