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श्लोक 7.63.27  |
यदा तु युद्धमाकाङ्क्षन् कश्चिदेनं समाह्वयेत्।
तदा शूलं गृहीत्वा तु भस्म रक्ष: करोति हि॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| जब कोई युद्ध की इच्छा से उसे ललकारता है, तब वह राक्षस उस भाले को लेकर अपने विरोधी को जलाकर भस्म कर देता है॥27॥ |
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| When someone challenges him with a desire for battle, then that demon takes that spear and burns his opponent to ashes.॥ 27॥ |
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