श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 63: श्रीराम द्वारा शत्रुघ्न का राज्याभिषेक तथा उन्हें लवणासुर के शूल से बचने के उपाय का प्रतिपादन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.63.24 
नायं मया शर: पूर्वं रावणस्य वधार्थिना।
मुक्त: शत्रुघ्न भूतानां महान् ह्रासो भवेदिति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
शत्रुघ्न! पहले मैंने रावण को मारने के लिए भी इस बाण का प्रयोग नहीं किया था, क्योंकि भय था कि इससे बहुत से प्राणी मर जाएँगे॥ 24॥
 
Shatrughna! Earlier I did not use this arrow even to kill Ravana because there was a fear that it would kill many creatures.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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