श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 63: श्रीराम द्वारा शत्रुघ्न का राज्याभिषेक तथा उन्हें लवणासुर के शूल से बचने के उपाय का प्रतिपादन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.63.11 
पुरोधसं च काकुत्स्थ नैगमानृत्विजस्तथा।
मन्त्रिणश्चैव तान् सर्वानानयध्वं ममाज्ञया॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ककुत्स्थ! मेरी आज्ञा से पुरोहित, वैदिक विद्वान, ऋत्विज और समस्त मन्त्रियों को बुलाओ॥11॥
 
Kakutstha! With my orders, call the priest, Vedic scholars, Ritvijas and all the ministers. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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