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श्लोक 7.63.10  |
सम्भारानभिषेकस्य आनयध्वं समाहिता:।
अद्यैव पुरुषव्याघ्रमभिषेक्ष्यामि राघवम्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| तुम सब लोग सावधानी से राज्याभिषेक की सामग्री एकत्रित करके ले आओ। अब मैं रघुकुलनन्दन पुरुषसिंह शत्रुघ्न का अभिषेक करूँगा॥ 10॥ |
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| All of you carefully collect and bring the materials for the coronation. I will now anoint Raghukulnandan Purushsingh Shatrughna.॥ 10॥ |
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