श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 63: श्रीराम द्वारा शत्रुघ्न का राज्याभिषेक तथा उन्हें लवणासुर के शूल से बचने के उपाय का प्रतिपादन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.63.10 
सम्भारानभिषेकस्य आनयध्वं समाहिता:।
अद्यैव पुरुषव्याघ्रमभिषेक्ष्यामि राघवम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तुम सब लोग सावधानी से राज्याभिषेक की सामग्री एकत्रित करके ले आओ। अब मैं रघुकुलनन्दन पुरुषसिंह शत्रुघ्न का अभिषेक करूँगा॥ 10॥
 
All of you carefully collect and bring the materials for the coronation. I will now anoint Raghukulnandan Purushsingh Shatrughna.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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