श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 62: श्रीराम का ऋषियों से लवणासुर के आहार-विहार के विषयमें पूछना और शत्रुघ्न की रुचि जानकर उन्हें लवण वध के कार्य में नियुक्त करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.62.4 
हत्वा बहुसहस्राणि सिंहव्याघ्रमृगाण्डजान्।
मानुषांश्चैव कुरुते नित्यमाहारमाह्निकम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘हर दिन वह हजारों शेरों, बाघों, हिरणों, पक्षियों और मनुष्यों को मारकर खा जाता है।
 
‘Every day he kills and eats thousands of lions, tigers, deer, birds and humans.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd