श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 62: श्रीराम का ऋषियों से लवणासुर के आहार-विहार के विषयमें पूछना और शत्रुघ्न की रुचि जानकर उन्हें लवण वध के कार्य में नियुक्त करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.62.17 
निवेशय महाबाहो भरतं यद्यवेक्षसे।
शूरस्त्वं कृतविद्यश्च समर्थश्च निवेशने॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! यदि तुम भरत को कष्ट देना उचित नहीं समझते, तो उसे यहीं रहने दो। तुम वीर योद्धा हो, शस्त्रविद्या जानते हो और नये नगर के निर्माण की शक्ति रखते हो॥17॥
 
‘Mahabaho! If you do not think it right to trouble Bharat, then let him stay here. You are a brave warrior, you know the art of weapons and you have the power to build a new city.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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