श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.61.6 
शूलं शूलाद् विनिष्कृष्य महावीर्यं महाप्रभम्।
ददौ महात्मा सुप्रीतो वाक्यं चैतदुवाच ह॥ ६॥
 
 
अनुवाद
महामनस्वी भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने अपने भाले से एक चमकीला, अत्यंत शक्तिशाली भाला उत्पन्न करके मधु को दिया और इस प्रकार कहा -॥6॥
 
The great-minded Lord Shiva became extremely pleased and created a gleaming, extremely powerful spear from his spear and gave it to Madhu and said this -॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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