श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.61.3 
पूर्वं कृतयुगे राजन् दैतेय: सुमहामति:।
लोलापुत्रोऽभवज्ज्येष्ठो मधुर्नाम महासुर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजा! सत्ययुग में एक बड़ा बुद्धिमान दैत्य हुआ था। वह लोल का ज्येष्ठ पुत्र था। उस महाबली दैत्य का नाम मधु था। 3॥
 
King! Earlier in Satyayuga there was a very intelligent demon. He was the eldest son of Lola. The name of that great demon was Madhu. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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